What is Operating System ? Type of Operating System?

What is Operating System ?  Explain the Type of Operating System ?

हेलो दोस्तों आज हम इस पोस्ट में What is Operating System and Explain the Type of Operating System  (ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? और ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार के बारे में पड़ेंगे।) । यह पोस्ट बहुत ही आसान लैंग्वेज में लिखा गया है। तो चलो शुरू करते हैं:-

What is Operating System (ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है ?) :- ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर तथा कंप्यूटर के बीच मध्यस्थ का कार्य करता है। यह हमारे निर्देशों को कंप्यूटर को समझता है ।

ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर है जो उसका कार्य करने में सक्षम बनाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक इंटरफेस उपलब्ध कराता है। 

Defination (परिभाषा) :- ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो अन्य कंप्यूटर प्रोग्राम का संचालन करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा अन्य सॉफ्टवेयर प्रोग्राम तथा हार्डवेयर का संचालन किया जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना कंप्यूटर एक निर्जीव वस्तु होता है क्योंकि ऑपरेटिंग सिस्टम बेजान हार्डवेयर को काम करने लायक बनाता है और हार्डवेयर के ऊपर अन्य सॉफ्टवेयर प्रोग्राम्स को भी चलने लायक सुविधा प्रदान करता है।

कंप्यूटर के आंतरिक भाग में किए गए सभी कार्य इनपुट आउटपुट को नियंत्रित करना, स्टोरेज इकाइयों में डाटा लिखना व पढ़ना आदि सभी कार्य ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा किए जाते हैं। बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्यूटर सिस्टम केवल हार्डवेयर है जो ना तो यूजर से दिशा निर्देश प्राप्त कर सकता है और न हीं अन्य डिवाइसेज से कार्य ले सकता है। कंप्यूटर की सभी सेवाओं को प्राप्त करना व प्रत्येक कार्य को क्रियान्वित ऑपरेटिंग सिस्टम ही करता है। 

कुछ प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम माइक्रोसॉफ्ट डॉस, विंडोज 95, विंडोज 98, 2000, 2003, विंडोज XP, विंडोज विस्टा, विंडोज 7 व 8 है । यूनिक्स भी एक प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम है जो मेनफ्रेम, सुपरकंप्यूटर और सर्वर के साथ प्रयोग किया जाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य (Function of Operating System) :- ऑपरेटिंग सिस्टम में के अन्य कार्य होते हैं जो कंप्यूटर के कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए किए जाते हैं। यह कार्य निम्नलिखित है :- 

1. File Management ( फाइल प्रबंधन) :- ऑपरेटिंग सिस्टम डाटा फाइल्स को प्रबंधित करता है । डाटा फाइल्स को द्वितीयक मेमोरी और प्राथमिक मेमोरी में लोड करना, उन्हें पढ़ना और बदलाव करना, फाइल का नाम बदलना, डिलीट करना आदि सभी क्रियाएँ ऑपरेटिंग सिस्टम करता है।

2. Resourc Management ( स्रोत प्रबंधन) :- ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के सभी स्रोतों जैसे प्राथमिक व द्वितीय मेमोरी, सीपीयू , प्रिंटर, नेटवर्किंग आदि को प्रबंधित करता है। यूजर द्वारा दी गई कमांडस के अनुसार ये स्त्रोत विभिन्न प्रोसेसिंग को बांटे जाते हैं।

3. Process Management ( कार्य प्रबंधन) :- ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर में प्रोसेस होने वाले सभी कार्यों को प्रबंधित करता है। सभी प्रोसेस को को सारणी या सूची के अनुसार क्रमबद्ध कर विभिन्न विधियों द्वारा संसाधित किया जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम अपनी कार्य क्षमता के अनुसार एक समय में एक से अधिक कार्य को प्रबंधित करता है। इसे मल्टीटास्किंग कहते हैं।

4. Memory Management ( मेमोरी मैनेजमेंट) :- ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर की मेमोरी को भी मैनेज करता है। कंप्यूटर में प्राइमरी और सेकेंडरी दो प्रकार की मेमोरी होती है। प्राइमरी मेमोरी में रैम और रोम आती है और सेकेंडरी में हार्ड डिस्क होती है। ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य इन्हीं मेमोरी को मैनेज करना होता है।

5. Computer Management ( कंप्यूटर मैनेजमेंट) :- ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य कंप्यूटर मैनेजमेंट का होता है। यूजर और कंप्यूटर के मध्य एक पुल की तरह कार्य करता है। यह एक तरह का माध्यम है जिसके बदौलत कंप्यूटर पर कार्य किया जाता है ।

ऑपरेटिंग सिस्टम को कंप्यूटर का दिल भी कहते हैं। इसके बिना कंप्यूटर कार्य नहीं कर पता है, यहां तक की ऑन भी नहीं होता है। कंप्यूटर को रन  करने के लिए उसमें ऑपरेटिंग सिस्टम का होना जरूरी है।

Type of Operating System ( ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार) :- ऑपरेटिंग सिस्टम निम्नलिखित प्रकार का होता है :-

1. Single User Operating System ( सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम) :- सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम वह ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसमें एक समय में केवल एक यूजर ही कंप्यूटर सिस्टम को एक्सेस कर सकता है। इसमें कंप्यूटर में एक यूजर कंप्यूटर को एक समय में एक ही कमांड / इनपुट दे सकता है। इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्यूटर घरों व दफ्तरों में प्रयोग होते हैं। Eg. MS-DOS ।

2. Multi User Operating System ( मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम) :- मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम वह होता है जिसमें एक समय में बहुत सारे यूजर कंप्यूटर को एक्सेस कर सकते हैं। एक से अधिक यूजर्स एक समय में अलग-अलग इनपुट देते हैं, और उनके द्वारा दी गई इनपुट को स्वीकृत कर यह ऑपरेटिंग सिस्टम उन्हें यथाचित आउटपुट देता है। Eg. UNIX , VMS।

3. Multiprocessing Operating System ( मल्टिप्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम) :- मल्टिप्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम वह ऑपरेटिंग सिस्टम होता है जिसमें एक से ज्यादा सी.पी.यू. का इस्तेमाल किया जाता है। एक से ज्यादा सी.पी.यू. होने की वजह से कंप्यूटर की परफॉर्मेंस बढ़ जाती है। मल्टिप्रोसेसिंग सिस्टम में एक समय पर कई कार्यों को एक साथ प्रोसेस करता है। इसमें सभी कार्य दो सी.पी.यू. में विभाजित हो जाते हैं। लाइनेक्स , यूनिक्स इसके उदाहरण है।

4. Multi Programming Operating System ( मल्टीप्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम) :- मल्टीप्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम वह ऑपरेटिंग सिस्टम होता है जो दो या दो से अधिक प्रोग्राम को केवल एक प्रोसेसर के द्वारा एग्जीक्यूट करता है। इसमें फाइल, सिस्टम, कमांड, प्रोसेसर, transient area और I/O कंट्रोल सिस्टम जैसे कॉम्पोनेंट्स शामिल होते हैं।

5. Multitasking Operating System ( मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम) :- मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम वह ऑपरेटिंग सिस्टम होता है जिसमें एक समय में बहुत सारे कार्य या टास्क किए जा सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट का विंडोज, एप्पल का Mac OS इसके उदाहरण है। Eg. Windows 95।

6. Real time Operating System ( रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम) :- रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम को रियल टाइम प्रोसेसिंग सिस्टम भी कहते हैं। इन सिस्टम में प्रत्येक कार्य को करने का समय निश्चित होता है। सी.पी.यू. को तय समय में कार्य पूर्ण करना होता है। यदि समय अधिक लगता है, तो सिस्टम को असफल माना जाता है। यह सिस्टम उन क्षेत्रों में प्रयोग होता है, जहां पर उच्च आउटपुट कम समय में प्राप्त करना होता है।

7. Time Sharing Operating System ( टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम) :- टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में समय का बटवारा होता है। सी.पी.यू. रनिंग प्रक्रिया के चरण में एक साथ कई प्रोसेस को लोड करता है, और सभी प्रोसेस को बराबर समय में बाँट कर उन्हें थोड़ा-थोड़ा प्रोसेस करता है। यह समय अंतराल कुछ मिली सेकंड या नैनो सेकंड का होता है। यह प्रक्रिया तीव्र गति से संपन्न होती है, की यूजर को भ्रम होता है, की सभी कार्य एक साथ क्रियान्वित हो रहे हैं। टाइम शेयरिंग सिस्टम के साथ कई यूजर्स एक साथ आपस में कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़कर कार्य कर सकते हैं। प्रत्येक कार्य को क्रियान्वित होने के लिए सी.पी.यू. का बहुत थोड़ा समय लगता है। सी.पी.यू. द्वारा कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर स्रोतों का संपूर्ण उपयोग किया जाता है।

निष्कर्ष :- अतः हम कह सकते हैं कि कंप्यूटर को कार्य करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार बिना आत्मा के मनुष्य के शरीर का कोई महत्व नहीं है, वैसे ही बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्यूटर का कोई महत्व नहीं है।

बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्यूटर कोई भी कार्य नहीं कर पाता हैं। आप चाहे टाइपिंग कर रहे हो या कंप्यूटर पर कोई वीडियो चल रहे हो, बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के सम्भव नहीं है। इंसान को कार्य करने के लिए जिस प्रकार हार्ट की आवश्यकता होती है, उसी  प्रकार कंप्यूटर को कार्य करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। 

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